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कैसे हम रिश्तों की डोर बनाएं मजबूत

हमारे समक्ष रिश्तों के अनेक रूप हैं। जैसे माता-पिता, भाई-बहन, भैया-भाभी, चाचा-चाची, फुंफा-भुअा, दादा-दादी, मामा-मामी एैसे कई रिश्ते हैं। इन रिश्तों के साथ ही अौर भी रिश्तें हैं जब एक लडकी शादी करके अपने ससुराल जाती हैं तब वो रिश्तें बनतें हैं। जैसें पति-पत्नी,सास-ससुर,नणद-देवर,जेठ-जेठानी,देवरानी अौर भी बहुत से रिश्तें हैं। इन सब रिश्तों काे मजबूत रखने के लिए बहुत सी एेसी बातें हैं जो हमें ध्यान में रखनी चाहिए।
रिश्तों को मजबूत करने के लिए पहल स्वयं से करनी होगी, स्वयं के व्यवहार को अच्छा बनाकर सबके प्रति कुशलता से व्यवहार रखना होगा। यदि हमारा व्यवहार “सरल” है, “मृदुतापूर्ण” हैं तो हम अपने परिवार को अपने रिश्तों को एक डोर में बांधकर रख पाएंगे। व्यक्ति के व्यवहार से ही उसकी पहचान होती है। जिसका व्यवहार अच्छा होगा, उसे सब पसन्द करेंगे। “व्यवहार कुशलता” व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है। जिससे उसके अाचरण पर पूरा प्रभाव पडता हैं अौर अच्छा अाचरण करने वाला व्यक्ति सब रिश्तों में सामंजस्थता बिठा सकता हैं।
“सहनशीलता का विकास” करना होगा। अाज के वातावरण में सहनशीलता की कमी नजर अाती हैं। सहन करने की शक्ति नहीं रहेगी तो रिश्तों में टकराव अवश्य रहेंगे। अाए दिन सुनने को मिलता हैं। भाई-भाई में झगडा हो गया, बाप-बेटे लडाई कर अलग हो गए, सास बहू में झगडा देवरानी- जेठानी में कलह खेर यह तो अाम बात हो गई। सबसे अहम बात हैं “तलाक” की। पति-पत्नी के रिश्तें टूटने का सबसे बडा कारण हैं “असहनशीलता”। वहीं यदि हम सहन करना सीख गए तो छोटी-छोटी बातों में तू-तू, मैं-मैं बंद हो जाएगी। खुशहाल परिवार सहनशीलता से ही हाेते हैं। परिवार खुशहाल रखने का महत्वपूर्ण घटक तत्व हैं – “सहिष्णुता”। जिस परिवार के सदस्य सहिष्णु होंगे वह परिवार कभी भी नही बिखरेगा।
“मधुरवाणी” अौर वाक्पटुता से रिश्तों में हमेशा मिठास बनी रहती हैं। जिस व्यक्ति की वाणी में मधुरता हैं जो कटु शब्द का प्रयोग नही करता, वह सबका प्रिय बन जाता हैं। वह व्यक्ति अपने अासपास के परिवेश को भी अपना बना लेता हैं। कभी भी अप्रिय शब्द नही बाेलने चाहिए।
यदि हमें अपने रिश्ते मजबूत रखने हैं तो हमें स्वयं विनम्र रहना पड़ेगा। बड़ो को पूर्ण से सम्मान देना, छोटों को प्रेम भाव से रखना अौर साथ ही साथ अादर भाव होना चाहिए। चाहे व रिश्ता छोटा हो या बड़ा। हम जिसको जितना सम्मान अौर प्यार देंगे, उससे कहीं ज्यादा हमें मिलेगा। यह बात थी हमारे सभी रिश्तों की लेकिन मेरी नजर में पति-पत्नी अौर सास-बहू का रिश्ता बहत नाजुक होता है। उसकी डाेर यदि हमनें मजबूत बना ली तो फिर काेई रिश्ता मजबूत हुए बिना नहीं रहेगा। पति-पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं अौर यह पूरकता तभी संभव हैं जब दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह समझेगें पति अौर पत्नी को एक दूसरे की पसंद नापसंद का ध्यान रखना चाहिए। दोनों को हमेशा यह अहसास होना चाहिए कि हम अपने जीवनसाथी को किस तरह खुश रख सकते हैं। अपने पति या पत्नी की कोई भी विशेषता हो उसे हमेशा सबके सामने उजागर करना चाहिए। किसी भी काम में रूचि हो उसमें एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। एक-दूसरे के प्रति सम्मान अौर समर्पण की भावना होनी चाहिए। एक बहुत महत्वपूर्ण बात यदि किसी बात से अाप दोनों में झगड़ा हो गया हो तो उसे किसी तीसरे के सामने नहीं लाना चाहिए। यदि पत्नी से गलती हो गई हो तो एेसा नहीं कि अाप किसी भी जगह, किसी के भी सामने उसे डांटने लगे।
बात को बार-बार उधेड़ने से बात बनने की बजाय बिगड़ जाएगी। कभी भी झगड़े की वजह को अौर गुस्सें में कही गई बातों को दोहराना नहीं चाहिए। एक बार जो हो गया उसे भूला देना चाहिए।
दूसरी तरह सास बहू का रिश्ता भी बड़ा नाजुक होता हैं। जब एक लड़की की शादी होती हैं तो उसे एक नया रिश्ता मिलता है सास का अौर कहा भी जाता हैं कि सास-बहू का तालमेल जहाँ बैठ गया वह परिवार हमेशा सुखी रहता है। एक बहू को अपनी सास को सबसे पहले अपनी माँ समझना होगा। जिस तरह वो पीहर में अपनी माँ को हर बात बताया करती थी उसी तरह यहाँ भी वह अपनी सास से कुछ छिपाये नहीं। यदि वह कुछ नहीं छिपाएगी तो उसकी सास भी अपनी बेटी की तरह सब बातें बताएगी।
तो यहाँ बन जाती हैं एक सास “सहेली” अौर यह तो तय है कि फिर सहेली से कभी तू-तू , मैं-मैं नहीं होगी। अपनी सास को हमेशा सम्मान दो, हम जितना सम्मान देंगे। उससे कहीं ज्यादा उनका प्यार हमें मिलेगा। अपनी सास की पसन्द – नापसन्द का पूरा ध्यान रखना चाहिए। जब अाप ध्यान रखेंगी तो उनको भी मन में रहेगा कि यह मेरा इतना ध्यान रखती हैं तो मैं तो बड़ी हूँ मुझे भी इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए।
अपने पति के साथ तो घूमने जाते ही हैं, अपनी सास के साथ भी बाहर जाना चाहिए। कहने का मतलब हैं कि सास बहू को अौर बहू सास को खुश रखना सीख लें तो सब रिश्तों में खुद ब खुद मजबूती बनी रहेगी। रिश्ता चाहे कोई भी हो सब के साथ प्रेमभाव से अादर से रहना चाहिए।

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