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संस्कार – निर्माण

सुन्दर संस्कारों का रोपन, बचपन में हो सहजारोपन। अपनी संस्कृति अपनी भाषा, अपनी शक्ति का क्यूं हो गोपन।। संस्कार है गति, प्रगति अौर समृदिॄ का प्रवेश द्वार। संस्कारों की सम्पदा एक उत्कृष्ट संपदा है। इस संपदा के सामने सारे वैभव फीके है। संस्कार का शाब्दिक अर्थ लें ताे – अाचरण का सही अाकार। किसी भी...
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परंपरा

मेरी दादी माँ कभी स्कूल नहीं जा पाई, उनका विवाह महज 9 साल की उम्र में हो गया था, और फिर बड़ा परिवार था हमारा, तो उनका सारा वक़्त रसोई में ही बीतता था। इसलिए उनके पढ़ने लिखने का शौक अधूरा ही रह गया। पर मेरी माँ (दादी माँ को हम माँ ही कहते थे)...
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अपराध

शहर के नज़दीक बसे एक छोटे से गाँव में कल रात एक बहुत बड़ी दुर्घटना घटी। एक ज़ख़्मी गाय, बीच सड़क पर रात भर तड़पती रही, लेकिन उसकी सहायता करने के लिए एक भी आदमी आगे नहीं आया, लेकिन जैसे ही उसकी मौत की ख़बर फैली, तो पुलिस, गाँव के सरपंच, ज़मींदार, सरकारी अफसर और...
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फ्रेंडस दिवस विकास का दिशा-सूचक यंत्र है

हमारे देश में अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। प्रायः हर माह का प्रथम रविवार किसी-न-किसी दिवस से जुड़ा होता है। अगस्त का प्रथम रविवार अन्तर्राष्ट्रीय फ्रेंडस दिवस के रूप में मनाया जाता है। वार्तमानिक परिवेश में मानवीय संवदेनाओं एवं आपसी रिश्तों की जमीं सूखती जा रही है ऐसे समय में एक दूसरे...
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त्रासद है उम्र की शाम का भयावह बनना

पूरी दुनिया में वृद्धों का समाज बढ़ रहा है और उनकी खिलखिलाहट कम होती जा रही है। भारत सहित अगर हम दुनिया का आकलन करें तो 2050 तक दुनियाभर में साठ वर्ष की उम्र वाले लोगों की तादाद 11 से बढ़कर 22 फीसद हो जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बुजुर्गों की आबादी छह करोड़...
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मदर टरेसाः शांति एवं सेवा का शंखनाद

माँ दुनिया का सबसे अनमोल शब्द है। एक ऐसा शब्द जिसमें सिर्फ अपनापन, सेवा, समर्पण और प्यार झलकता है। माँ हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती है। माँ शब्द जुबान पर आते ही एक नाम सहज ही सामने आता है और वह हैं मदर टरेसा का। कलियुग में वे मां का एक आदर्श प्रतीक...
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कैसे हम रिश्तों की डोर बनाएं मजबूत

हमारे समक्ष रिश्तों के अनेक रूप हैं। जैसे माता-पिता, भाई-बहन, भैया-भाभी, चाचा-चाची, फुंफा-भुअा, दादा-दादी, मामा-मामी एैसे कई रिश्ते हैं। इन रिश्तों के साथ ही अौर भी रिश्तें हैं जब एक लडकी शादी करके अपने ससुराल जाती हैं तब वो रिश्तें बनतें हैं। जैसें पति-पत्नी,सास-ससुर,नणद-देवर,जेठ-जेठानी,देवरानी अौर भी बहुत से रिश्तें हैं। इन सब रिश्तों काे मजबूत...
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लता मंगेशकर – अद्भुत, अकल्पित हैै स्वर-माधुर्य की साम्राज्ञी

वो ब्रह्म है। कोई उससे बड़ा नहीं। वो प्रथम सत्य है और वही अंतिम सत्ता भी। वो स्वर है, ईश्वर है, ये केवल संगीत की किताबों में लिखी जाने वाली उक्ति नहीं, ये संगीत का सार है और इसी संगीत एवं स्वर-माधुर्य की साम्राज्ञी है लता मंगेशकर। गीत, संगीत, गायन और आवाज की जादूगरी की...
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